
नेपाल की राजनीति इस समय बड़े उथल-पुथल से गुजर रही है। Gen Z प्रोटेस्ट के बीच जब युवाओं ने बदलाव की मांग उठाई तो एक नाम सबसे आगे आया — सुशीला कार्की (Sushila Karki)। नेपाल की पहली महिला चीफ़ जस्टिस रह चुकीं कार्की को अब अंतरिम प्रधानमंत्री बनाने की चर्चाएँ तेज़ हैं।
उन्होंने 1979 में वकालत शुरू की और धीरे-धीरे न्यायपालिका में ऊँचे पद तक पहुँचीं।
हाल ही में नेपाल में Gen Z आंदोलन छेड़ा गया। युवा पीढ़ी ने सोशल मीडिया बैन, भ्रष्टाचार और पारंपरिक राजनीति के खिलाफ जोरदार विरोध किया। प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद युवाओं और नागरिक समाज ने सुशीला कार्की को अंतरिम नेतृत्व के लिए आगे बढ़ाया। Kathmandu Mayor बालेन शाह समेत कई प्रभावशाली व्यक्तियों ने भी उनका समर्थन किया। लोग मानते हैं कि उनका गैर-राजनीतिक बैकग्राउंड और ईमानदार छवि उन्हें इस भूमिका के लिए उपयुक्त बनाती है।
सुशीला कार्की सिर्फ नेपाल की पहली महिला चीफ़ जस्टिस ही नहीं, बल्कि अब एक ऐसी शख्सियत हैं जिन पर पूरा देश भरोसा जता रहा है। यदि वह अंतरिम प्रधानमंत्री बनती हैं, तो यह नेपाल की राजनीति के इतिहास में महिला नेतृत्व और न्यायपालिका आधारित पारदर्शिता की मिसाल होगी।