
झारखंड की राजनीति और आदिवासी आंदोलन का नाम लेते ही सबसे पहले जो नाम सामने आता है, वह है शिबू सोरेन।
11 जनवरी 1944 को रामगढ़ (तत्कालीन बिहार) में जन्मे सोरेन ने बचपन से ही आदिवासी हक़ और सम्मान के लिए संघर्ष शुरू कर दिया।
1972-73 में उन्होंने एके रॉय और बिनोद बिहारी महतो के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की नींव रखी।
लोग उन्हें प्यार से ‘दिशोम गुरु’ कहते हैं — जिसका मतलब है आदिवासियों का नेता।
4 अगस्त 2025 को सुबह 8:56 बजे, दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया।
राज्य सरकार ने 4 से 6 अगस्त तक तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया।
पार्थिव शरीर को रांची लाकर विधानसभा, JMM कार्यालय और आवास पर आम जनता के दर्शन के लिए रखा गया।
इसके बाद उनके पैतृक गांव नेमरा (रामगढ़) में पूरे राजकीय सम्मान और आदिवासी रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई बड़े नेताओं ने श्रद्धांजलि दी।
PM मोदी का हेमंत सोरेन को गले लगाकर सांत्वना देने का दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
हेमंत सोरेन का जन्म 10 अगस्त 1975 को हुआ।
वे वर्तमान में झारखंड के मुख्यमंत्री और अप्रैल 2025 से JMM अध्यक्ष हैं।
2024 में ED की गिरफ्तारी के बाद उन्होंने इस्तीफ़ा दिया, लेकिन ज़मानत के बाद फिर से सत्ता में लौटे और नवंबर 2024 में जीत हासिल की।
पिता के निधन पर उन्होंने भावुक होकर कहा —
“मैं शून्य हो गया हूं, मेरा सब कुछ चला गया।”