
क्या आपने कभी सोचा है कि इस ब्रह्मांड की रचना कैसे हुई होगी? पुराणों के अनुसार जब चारों ओर घना अंधकार छाया था, तब मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की सृष्टि की।
इसी वजह से इन्हें “सृष्टि की जननी” भी कहा जाता है।
नवरात्रि का चौथा दिन मां कुष्मांडा की आराधना को समर्पित होता है और माना जाता है कि इस दिन की पूजा से जीवन में ऊर्जा, सुख-समृद्धि और आयु में वृद्धि होती है।
पौराणिक मान्यता है कि ब्रह्मांड की रचना से पहले चारों ओर केवल अंधकार था। जब कोई भी अस्तित्व नहीं था, तब मां दुर्गा ने कुष्मांड (कुम्हड़े/हंसी) के समान अपनी मुस्कान से प्रकाश फैलाया और ब्रह्मांड का निर्माण किया।
इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है क्योंकि इनकी आठ भुजाएं हैं जिनमें कमंडल, धनुष, बाण, अमृतकलश, चक्र, गदा, माला और कमल सुशोभित रहते हैं।
मां कुष्मांडा की सवारी सिंह है, जो शक्ति और पराक्रम का प्रतीक है।
नवरात्रि का चौथा दिन मां कुष्मांडा की आराधना का पर्व है।
माना जाता है कि यदि श्रद्धापूर्वक मां की पूजा की जाए तो भक्त को अपार आशीर्वाद मिलता है।
इस दिन मालपुआ का भोग लगाना और मां के मंत्र का जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है।
जो भी भक्त मां कुष्मांडा की उपासना करता है, उसके जीवन से रोग-दोष समाप्त हो जाते हैं और सुख-समृद्धि का स्थायी वास होता है।