जम्मू में बारिश का कहर: Tawi पुल टूटा, नेटवर्क ठप और जनजीवन अस्त-व्यस्त

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शुरुआत – “क्या हुआ है ?”

क्या हुआ है? चलिए जानते हैं…
जम्मू और कश्मीर इन दिनों मॉनसून की सबसे बड़ी मार झेल रहा है। आसमान से बरसते पानी ने ज़मीन पर तबाही मचा दी है। कटरा से लेकर डोड़ा तक और जम्मू शहर से लेकर वैष्णो देवी यात्रा मार्ग तक हर जगह बारिश ने अपना कहर ढा दिया है।
Tawi नदी का पुल टूट गया, दर्जनों ट्रेनें रद्द कर दी गईं, सैकड़ों गाड़ियाँ फँस गईं और सबसे बड़ी बात—Jio, Airtel समेत सभी नेटवर्क घंटों से ठप पड़े हैं।

तबाही की ताज़ा कहानी

  • Tawi ब्रिज ढह गया: भारी बारिश से उफनती Tawi नदी ने जम्मू का मुख्य पुल तोड़ दिया। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसमें कार और बाइक पुल से लटकते और बहते नज़र आ रहे हैं।
  • डोड़ा में क्लाउडबर्स्ट: डोड़ा जिले में अचानक बादल फटने से फ्लैश फ्लड आ गया। कई घर बह गए और तीन लोगों की मौत हो गई।
  • वैष्णो देवी यात्रा प्रभावित: कटरा मार्ग पर भूस्खलन ने 30 से अधिक श्रद्धालुओं की जान ले ली। कई लोग घायल हुए और यात्रा को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा।
  • रेल और सड़क संपर्क ठप: जम्मू से श्रीनगर और दिल्ली की ओर जाने वाली 22 ट्रेनें रद्द और 27 को शॉर्ट-टर्मिनेट किया गया। हाईवे जगह-जगह बंद हैं।

असर और विश्लेषण

  1. रिकॉर्ड तोड़ बारिश: सिर्फ एक दिन में जम्मू में 368 मिमी से अधिक बारिश हुई। यह पिछले कई सालों का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
  2. इंफ्रास्ट्रक्चर ध्वस्त: पुल, सड़कें और रेलवे ट्रैक बह गए। कई जगह बिजली और पानी की सप्लाई ठप हो गई।
  3. नेटवर्क ब्लैकआउट: ऑप्टिकल फाइबर डैमेज होने से Jio, Airtel, BSNL—सबकी मोबाइल कॉलिंग, इंटरनेट और ब्रॉडबैंड सेवाएँ ठप हैं। लोग अपने परिजनों से संपर्क नहीं कर पा रहे।
  4. आर्थिक नुकसान: पर्यटन, व्यापार और धार्मिक यात्रा पर गहरा असर पड़ा। कटरा, जम्मू और श्रीनगर में होटल और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पूरी तरह से प्रभावित हैं।

राहत और मदद

  • NDRF, SDRF और सेना ने राहत अभियान शुरू कर दिया है।
  • सैकड़ों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है।
  • अस्थायी शेल्टर, भोजन और पानी की व्यवस्था की गई है।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक जताते हुए हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है।

आगे क्या होगा?

अब देखना होगा आगे क्या होता है…

  • क्या बारिश थमेगी और हालात सामान्य होंगे?
  • क्या नेटवर्क और ट्रांसपोर्ट सेवाएँ जल्दी बहाल हो पाएँगी?
  • और क्या यह आपदा हमें भविष्य में बेहतर आपदा प्रबंधन (Disaster Management) की ओर प्रेरित करेगी?