
पिछले कुछ महीनों से बांग्लादेश में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए थे। अगस्त 2024 में शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब देश की सबसे बड़ी राजनीतिक घटना बन चुका है। इसी बीच पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को International Crimes Tribunal (ICT-BD) ने “मानवता के खिलाफ अपराध” के मामले में दोषी ठहराते हुए बड़ा फैसला सुनाया।
इस फैसले को लेकर बांग्लादेश ही नहीं, भारत में भी हलचल तेज है।
बांग्लादेश में नौकरियों में आरक्षण को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अचानक देशव्यापी विरोध में बदल गया।
रिपोर्टों के मुताबिक:
इन्हीं घटनाओं के आधार पर ICT कोर्ट ने केस दर्ज किया।
अदालत ने शेख हसीना को तीन बड़े आरोपों में दोषी माना:
उन पर आंदोलन को रोकने के लिए बल प्रयोग का आदेश देने का आरोप लगा।
कथित तौर पर सुरक्षा बलों को “किसी भी कीमत पर आंदोलन रोकने” की अनुमति दी गई।
सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई पर नियंत्रण न रखने का भी आरोप जुड़ा।
इन आरोपों के आधार पर उन्हें कड़ी सज़ा सुनाई गई, जिसने पूरे बांग्लादेश को हिला दिया है।
ICT कोर्ट के फैसले के समय शेख हसीना बांग्लादेश में मौजूद नहीं थीं।
अब गेंद भारत के कोर्ट और सरकार के पाले में है।
भारत के सामने दो रास्ते हैं:
इससे बांग्लादेश की न्याय प्रक्रिया आगे बढ़ेगी
लेकिन दक्षिण एशिया की राजनीति में भारत की छवि पर बड़ा असर पड़ेगा।
अगर भारत ऐसा करता है, तो यह दक्षिण एशिया की राजनीति को नया मोड़ दे सकता है।
भारत सरकार ने आधिकारिक बयान अभी तक जारी नहीं किया है।
फैसले के बाद:
देश राजनीतिक अनिश्चितता से गुजर रहा है।