नवरात्रि 2025 का चौथा दिन: मां कुष्मांडा की पूजा विधि, कथा और महत्व

Navratri 2025

📢 हमारे ऑफिशियल ग्रुप से जुड़ें

📱 WhatsApp Channel ✈️ Telegram Group

क्या आपने कभी सोचा है कि इस ब्रह्मांड की रचना कैसे हुई होगी? पुराणों के अनुसार जब चारों ओर घना अंधकार छाया था, तब मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की सृष्टि की।
इसी वजह से इन्हें “सृष्टि की जननी” भी कहा जाता है।
नवरात्रि का चौथा दिन मां कुष्मांडा की आराधना को समर्पित होता है और माना जाता है कि इस दिन की पूजा से जीवन में ऊर्जा, सुख-समृद्धि और आयु में वृद्धि होती है।

मां कुष्मांडा की कथा (Main Story)

पौराणिक मान्यता है कि ब्रह्मांड की रचना से पहले चारों ओर केवल अंधकार था। जब कोई भी अस्तित्व नहीं था, तब मां दुर्गा ने कुष्मांड (कुम्हड़े/हंसी) के समान अपनी मुस्कान से प्रकाश फैलाया और ब्रह्मांड का निर्माण किया।

इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है क्योंकि इनकी आठ भुजाएं हैं जिनमें कमंडल, धनुष, बाण, अमृतकलश, चक्र, गदा, माला और कमल सुशोभित रहते हैं।
मां कुष्मांडा की सवारी सिंह है, जो शक्ति और पराक्रम का प्रतीक है।

पूजा विधि और सामग्री (Detailed Analysis)

पूजा की सामग्री

  • मां कुष्मांडा की प्रतिमा या चित्र
  • लाल/पीले फूल और चुनरी
  • दीपक व धूप
  • फल और मालपुआ (विशेष भोग)
  • रोली, अक्षत, गंगाजल
  • नारियल और कलश

पूजा विधि

  1. सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और कलश स्थापना करें।
  3. मां कुष्मांडा की प्रतिमा/चित्र के सामने दीपक और धूप जलाएं।
  4. लाल फूल, चुनरी, नारियल और फल अर्पित करें।
  5. मां को विशेष रूप से मालपुआ का भोग अर्पित करें।
  6. मंत्र “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कुष्माण्डायै नमः” का 108 बार जाप करें।
  7. अंत में मां की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।

नवरात्रि चौथे दिन का शुभ मुहूर्त 2025

  • तिथि: 21 सितम्बर 2025 (रविवार)
  • पूजा का श्रेष्ठ समय: सुबह 06:15 AM से 08:30 AM तक
  • अभिजीत मुहूर्त: 11:50 AM से 12:40 PM तक

मां कुष्मांडा की पूजा के लाभ

  • घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ दूर होती हैं।
  • धन, वैभव और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  • आत्मविश्वास और कार्यक्षमता में वृद्धि होती है।
  • जीवन की हर बाधा धीरे-धीरे समाप्त होती है।

निष्कर्ष

नवरात्रि का चौथा दिन मां कुष्मांडा की आराधना का पर्व है।
माना जाता है कि यदि श्रद्धापूर्वक मां की पूजा की जाए तो भक्त को अपार आशीर्वाद मिलता है।
इस दिन मालपुआ का भोग लगाना और मां के मंत्र का जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है।
जो भी भक्त मां कुष्मांडा की उपासना करता है, उसके जीवन से रोग-दोष समाप्त हो जाते हैं और सुख-समृद्धि का स्थायी वास होता है।